Sangya Noun
संज्ञा
संज्ञा
संज्ञा-किसी
वस्तु ,व्यक्ति और स्थान के नाम को संज्ञा कहते हैं | जैसे-पुस्तक, राम, कानपुर आदि ये मुख्तयः तीन प्रकार की होती है -
व्यक्तिवाचक संज्ञा
जाति वाचक संज्ञा
भाववाचक संज्ञा
व्यक्तिवाचक संज्ञा-जिस
शब्द से किसी विशेष व्यक्ति अथवा स्थान के वारे में पता चलता है उस शब्द को
व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं जैसे -गाजियाबाद, मीरा, श्याम आदि
जातिवाचक संज्ञा -जिस
शब्द से व्यक्ति अथवा स्थान की जाति का बोध होता है जैसे -शहर,लड़की,लड़का आदि यहाँ
पर शहर ,लड़की या लड़का कहने से किसी जाति का पता चल रहा है | किंतु
गाजियाबाद, मीरा ,श्याम
कहने से किसी विशेष स्थान और व्यक्ति की ओर
संकेत हो रहा है क्योंकि लड़का या
लड़की या शहर
कहने से ये पता ही नहीं चलता है कि कौन सा लड़का या लड़की या कौन सा
शहर|
जातिवाचक संज्ञा के
ही दो भाग कर दिए गए हैं- समूह
वाचक संज्ञा और द्रव्य वाचक संज्ञा
समूह वाचक संज्ञा-
जिन शब्दों से समूह का बोध होता है उन शब्दों को समूह वाचक संज्ञा कहते हैं
जैसे-कक्षा, पुस्तकालय, सेना
आदि यहां पर हम देखते हैं- एक विद्यार्थी
से या एक सिपाही से या एक पुस्तक से कक्षा, सेना
और पुस्तकालय नहीं बन सकते हैं| अतः ये शब्द समूहवाचक संज्ञा हैं|
द्रव्य वाचक संज्ञा -जिन
शब्दों से किसी द्रव्य या पदार्थ का बोध
होता है और जिनको गिना नहीं जा सकता है उन शब्दों को द्रव्य वाचक संज्ञा कहते हैं
जैसे - सोना, चांदी
,लोहा, लकड़ी, दूध ,पानी ,तेल, प्लास्टिक इन
वस्तुओं को तोला तो जा सकता है किन्तु
गिना नहीं जा सकता|
भाव वाचक संज्ञा- किसी वस्तु या पदार्थ या व्यक्ति के गुणों का बोध
कराने वाले शब्दों को भाव वाचक संज्ञा कहते हैं जैसे-प्रेम,घृणा ,वीरता, सुन्दरता, सौंदर्य आदि
विशेषण, क्रिया, सर्वनाम
अव्यय और जातिवाचक संज्ञा से भाव वाचक संज्ञा बन जाती है जैसे-
विशेषण शब्दों से भाव वाचक संज्ञा
बनाना - प्रेमी से प्रेम ,घृणित से घृणा ,वीर से वीरता, सुन्दर से सुंदरता ,ये सब शब्द विशेषण हैं |
क्रिया शब्दों से भाव वाचक संज्ञा
बनाना - रहना -सहना से रहन-सहन ,लेना-देना से लेन-देन ,बिकना से बिक्री ,चलना से चाल ,हंसना से हंसी ,दौड़ना से दौड़ ,
सर्वनाम शब्दों से भाव वाचक संज्ञा
बनाना-- अहम से अहंकार, आप से आपा, पराया, से परायापन, स्व
से स्वत्व, अपना
से अपनापन, मम
से ममत्व या ममता आदि|
अव्यय शब्दों से भाव वाचक संज्ञा -
नीचे से नीचाई या नीचता ,समीप से समीपता, शाबाश से शाबाशी, भीतर से भीतरी, दूर से दूरी, मना से मनाही|
जातिवाचक संज्ञा से भाव वाचक संज्ञा बनाना -
दास से दासता ,माता
से मातृत्व ,जाति
से जातीयता ,शत्रु
से शत्रुता, पशु
से पशुता, देव से देवत्व, बूढ़ा
से बुढ़ापा ,पात्र
से पात्रता, नारी
से नारीत्व आदि|